पल्लवी ने अपनी ही शादी में बदल दी बड़ी रीत तो वाह-वाह कर उठे लोग, दूल्हे ने भी निभाया साथ और सबने कहा शाबाश!
मोतिहारी/अवनीश कुमार सिंह. 21वीं सदी के भारत में समाजिक बदलाव हो रहे हैं पुरानी पीढ़ी का नजरिया भी बदल रहा है. आज की युवा पीढ़ी इसको आगे बढ़ा रही है और पुरानी परंपराओं को तोड़कर नई परंपरा की शुरुआत भी कर रही है. ऐसी ही एक कहानी पश्चिम चंपारण से सामने आई है. पल्लवी और सुरेश कुमार की शादी ठीक हुई और दोनों घर के लोग शादी के विधि विधान और रीति रिवाज की तैयारी में जुटे थे. लेकिन, बढ़ते खर्च और महंगाई को देखते हुए नई नवेली दुल्हन पल्लवी ने खुद दूल्हे को फोन कर तमाम फुजूल खर्ची और बेकार के रस्मों को खत्म कर नए तरीके से शादी करने का प्लान बना लिया.
बगहा नगर परिषद क्षेत्र की पल्लवी कुमारी ने दूल्हे सुरेश कुमार को खुद से फोन किया और यह समझाया कि पूर्वी चंपारण की ढाका से बगहा आने में बारातियों को लाने में काफी खर्च होंगे और बेकार के पैसे बर्बाद होंगे. इससे अच्छा है कि दोनों लोग बिना ताम-झाम के शादी करके एक दूसरे के हो जाएं. यह आइडिया दूल्हे सुरेश कुमार को पसंद आया, लेकिन दूल्हे के परिवार वाले तैयार नहीं हुए. हालांकि, नई नवेली होने वाली दुल्हन के कहने पर परिवार वालों ने भी हामी भर दी. उसने यह समझाया कि दिखावे की जिंदगी और फिजूलखर्ची और दिखावे के कारण पहले भी हम लोग कर्ज में डूबे थे. इस बार भी अगर फिजूलखर्ची हुई तो मेरे परिवार के साथ-साथ दूल्हे का परिवार भी कर्ज में डूब जाएगा. इसलिए, खर्च बचाने के लिए सादे समारोह में शादी की जाए.
इसके बाद लड़की खुद बगहा से चलकर लड़के वालों के घर ढाका पहुंच गई. बिना बैंड बाजा और बिना ताम झाम के साथ दोनों की शादी हुई. पल्लवी ने इस मान्यता को खत्म कर दिया कि लड़का ही बाराती लेकर आता है, बल्कि इस बार पल्लवी खुद अपने घर परिवार और सगे संबंधियों के साथ बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंच गई. दोनों की शादी हुई….इसमें ना बैंड बाजा, ना खाना-पीना हुआ ना और ना कोई फिजूलखर्ची हुई.
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